Friday, 17 June 2016

'क़िस्सा मिरे जुनूं का बहुत याद आएगा'



शायर शहरयार आज होते तो 80 बरस के होते. शहरयार की सबसे फेमस किताब है- ‘ख्वाब के दर बंद हैं. 2008 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला. शहरयार ने ‘गमन’, ‘अंजुमन’ और ’उमराव जान’ जैसी फ़िल्मों के लिए भी गीत लिखे. पढ़िए शहरयार की ये गजल-

क़िस्सा  मिरे  जुनूं  का   बहुत   याद   आएगा
जब-जब   कोई   चिराग   हवा   में   जलाएगा
रातों  को  जागते  हैं,  इसी  वास्ते  कि  ख्वाब
देखेगा  बंद   आंखें   तो   फिर   लौट   जाएगा
कब से बचा के रक्खी है  इक  बूंद  ओस  की
किस  रोज़  तू   वफ़ा   को  मिरी   आज़माएगा
कागज़  की  कश्तियां  भी  बड़ी  काम  आएंगी
जिस   दिन   हमारे   शहर   में   सैलाब   आएगा
दिल को यकीन है कि सर-ए-रहगुज़ार-ए-इश्क
कोई    फ़सुर्दा    दिल   ये    ग़ज़ल    गुनगुनाएगा

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