अप्रेजल का मौसम है. ये बात मैं इसी वेबसाइट पर तीन महीने में सातवीं बार लिख रहा हूं. ऑफिस वालों का सीक्रेट यही है, यहां हमेशा अप्रेजल का मौसम चलता है. फिलहाल ये कि चिट्ठियां पहुंचने लगी हैं. जो उम्मीद से हैं, वही परेशान हैं. आपने भी उम्मीदें पाल रखीं हों तो ये शेर रट लीजे. जरूरत तो पड़ेगी ही. और शेर याददाश्त पर लिखे-बिगाड़े गए हैं. जहां, जिनके हों उन्हें समर्पित, उनसे माफी समेत.
अर्जियां सारी चेहरे पे लिख के लाया हूं,
तुमसे क्या मांगू तुम खुद ही समझ लो
तुमसे क्या मांगू तुम खुद ही समझ लो
दीवानगी इस से बढ़कर और क्या होगी,
आज भी इंतजार है सैलरी बढ़ जाने का
आज भी इंतजार है सैलरी बढ़ जाने का
नाइट शिफ्ट में रहा, वर्क फ्रॉम होम किया
हमारे काम का चर्चा कहां-कहां न हुआ
उम्मीदे वादए दीदार ए हाइक का रहा
सब हमारा ही था, बस एचआर वाला न हुआ
हमारे काम का चर्चा कहां-कहां न हुआ
उम्मीदे वादए दीदार ए हाइक का रहा
सब हमारा ही था, बस एचआर वाला न हुआ
मैंने बांटी हैं जहां में इस क़दर खुशियां
मेरे अप्रेजल का जो हाल सुनेगा वो रो देगा
मेरे अप्रेजल का जो हाल सुनेगा वो रो देगा
साल भर किया काम वो रोएंगे रात भर,
बॉस के व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर हंसे जो सोएंगे रात भर
बॉस के व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर हंसे जो सोएंगे रात भर
मौत के इम्तिहान से मुझको गुजरना है अभी
लाज़िमी है क्योंकि स्विचओवर के लिए जिंदा हूं मैं
लाज़िमी है क्योंकि स्विचओवर के लिए जिंदा हूं मैं
आदतन बॉस ने कर दिए वादे,
आदतन हमने एतबार किया
आदतन हमने एतबार किया
अप्रेजल हो, प्रमोशन हो, न बेल कर्व हो,
दिल में रह रह के ये अरमान चले आते हैं
दिल में रह रह के ये अरमान चले आते हैं
थी खबर गर्म, अप्रेजल में बढ़ेंगे पैसे
चिट्ठी हमको भी मिली, पै तमाशा न हुआ
चिट्ठी हमको भी मिली, पै तमाशा न हुआ
गम अप्रेजल का नहीं करते खानाबदोश ,
वो तो हर बार स्विच करने का हुनर जानते हैं
वो तो हर बार स्विच करने का हुनर जानते हैं
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