Wednesday, 25 May 2016

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रहस्यमयी शिवलिंग पर मचा बवाल

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में नया बवाल खड़ा हो गया है. यूनिवर्सिटी मेन गेट के सामने गार्डन में एक रहस्यमयी शिवलिंग तनाव की वजह बन गया है. सोमवार को लोगों को इस शिवलिंग और नंदी के बारे में पता चला. इससे पहले बौद्ध भिक्षुओं को कैंपस में घुसने से मना कर दिया गया था. इसके बाद करीब 50 छात्रों ने मिलकर कुछ प्रोफेसर्स के साथ यूनिवर्सिटी गेट के बाहर बुद्ध जयंती मनाई थी.

किसी को खबर नहीं कहां से आया शिवलिंग

अचानक से सामने आए शिवलिंग के बारे में यहां रह रहे प्रोफेसर कह रहे हैं कि हमें नहीं पता ये कब आया. स्टूडेंट्स का एक गुट इसे ब्राह्मणवादी ताकतों की साजिश बता रहा है. यूनिवर्सिटी को इसकी कोई जानकारी नहीं थी. जब शिकायत हुई तो वो भी सकते में आ गई.

गैरकानूनी ढांचों को हटाने का यूनिवर्सिटी ने किया था फैसला

ये शिवलिंग यूनिवर्सिटी के सारे गैरकानूनी ढांचों और टेंट्स को हटाये जाने के फैसले के बाद सामने आया है. इस फैसले के बाद वेलिवाडा यानी रोहित का स्मारक, और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने रोहित की याद में, यूनिवर्सिटी के बीच में जो दलित बस्ती बनाई है. उसे भी हटाया जाना था. ये वहीं बनी है जहां रोहित वेमुला ने अपने आखिरी दिन गुजरे थे.

जॉइंट एक्शन कमेटी में गुस्सा

जॉइंट एक्शन कमेटी की प्रमुख सदस्य अर्पिता जया का कहना है, हमें जब इसके बारे में पता चला तो हमें बहुत बुरा लगा. वो भी जब सरकार लगातार रोहित स्तूप और वेलिवाडा को निशाना बना रही है. वे एक दशक से यूनिवर्सिटी में हैं. कहती हैं कभी ऐसा नहीं हुआ.

यूनिवर्सिटी की जद में है जगह

संवैधानिक रूप से सभी सरकारी संस्थाएं सेक्युलर हैं. अचानक से शिवलिंग के सामने आने से स्टूडेंट्स के बीच हलचल मच गई है. मुश्किल से यूनिवर्सिटी के मेनगेट से 200 मीटर दूर इसे एक ऐसे गार्डन में रखा है. जिसका रख-रखाव यूनिवर्सिटी करती है.

टीचर्स में भी गुस्सा

एससी/एसटी टीचर्स फोरम की प्रवक्ता श्रीपथी रामदू कहती हैं, कुछ दिनों से यूनिवर्सिटी के अंदर और बाहर बहुत सारा निर्माण-कार्य चल रहा है. पर अब तक मैंने यूनिवर्सिटी के बाहर कभी कोई शिवलिंग और नंदी नहीं देखा था. जबकि 2009 से ही मैं यूनिवर्सिटी में हूं.

यूनिवर्सिटी में बैन होते हैं धार्मिक मामले

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एम सुधाकर ने कहा है सरकारी संस्था होने के नाते हमें संविधान का पालन करना होगा. जब संविधान की प्रस्तावना में ही लिखा है कि देश धर्मनिरपेक्ष है. तो धर्म से जुड़ा कोई भी मसला कैंपस में नहीं उठना चाहिए. यूनिवर्सिटी स्पेस में किसी भगवान की तस्वीर की भी नहीं अनुमति है. अपने रहने के स्थानों पर स्टूडेंट्स को अपने धर्म के हिसाब से रहने की आजादी है. बहरहाल इस मामले की पूरी जांच के बाद ही सोचा जायेगा कि शिवलिंग और नंदी का क्या करना है?

पहले भी हुआ है बवाल

कुछ दिनों पहले शुक्रवार की नमाज पढ़ने के लिए कुछ मुस्लिम स्टूडेंट्स ने एक दीवार खड़ी की थी. कुछ सिख स्टूडेंट्स ने भी परिसर के अंदर ही गुरुद्वारा बनाने की अनुमति मांगी थी. तब यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने मुस्लिम स्टूडेंट्स को दीवार हटाने और सभी तरह के धार्मिक ढांचे बैन करने का आदेश जारी किया था.

जलाई गयीं वीसी के फैसले की कॉपियां

सोमवार की रात जॉइंट एक्शन कमेटी ने वीसी के उस फैसले की कापियां जलायीं जिसमें स्टूडेंट यूनियन को सभी गैरकानूनी ढांचों और टेंट को हटाने को कहा गया था. स्टूडेंट्स ने फिर से टेंट लगा लिए हैं. और एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ प्रोटेस्ट पर बैठ गए हैं.

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